मोहब्ब्त से जितना मिलने की ख़ुशी होती हैं!
मोहब्ब्त से बिछड़ने का गम भी होती है!

मोहब्ब्त का आलम कहूँ!
मोहब्ब्त का सितम सहूँ!

दिलवर से मिलने की तड़प!
दिलवर से बिछड़ने की ललक कहें!

सुनते है वें आज ख़ामोश है!
मेरा ख़बर सुनते ही उनके लब मुस्कुरा गए!

अब हाल-ए-मोहब्ब्त ब्या कर दिए!
मैं तलाब की तरह शांत हो गया हूँ!

मोहब्ब्त ए नशीब सुन के घबरा गए!
दुनियां की दास्तान क्या सुनाए हम!

एक ही आरजू था उनसे रू ब रू हो जाए
अकेले घर मे सोच सोच के तन्हा दिन गुजार दिए!
प्रेम प्रकाश
21/08/2018

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