नार नवेली

नार नवेली
——–

देखी हमने नार नवेली,
संग में ना थी सखी सहेली,
करती साजन का इंतजार ।
पलक उठाके तुरन्त गिराती,
मन ही मन वह तो शर्माती,
चित्त में उठते सौ सौ ज्वार ।
साजन जाने कब आ जाए,
पदचापों की आस लगाए,
खुशियां मिलती उसे हजार ।
साजन से मिलकर वह बोली,
सुन लो मेरे ओ हमजोली,
तुम बिन व्यर्थ मेरा संसार ।

No votes yet.
Please wait...

बिहोर सिंह "विहंग"

20 वर्ष एक शस्त्र सैनिक के रूप में भारतीय वायु सेना में सेवा के उपरांत वर्तमान में भारतीय स्टेट बैंक में अधिकारी संपर्क सूत्र 9999480645 Email-bihor22@gmail.com

Leave a Reply

Close Menu