नारी सबला

Home » नारी सबला

नारी सबला

By |2018-08-26T20:06:13+00:00August 26th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

०७.०५.२०१६
“नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे।”

“नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,
लिखते हो तो शोषित जन के कातर हाहाकार लिखो रे,

है नारी भगिनी-सुता, माता नारी है, पत्नी नारी है,
जन्म दिया, पोषण देती है, धरती सम बेचारी है,
इनका तो सम्मानजनक तुम शील-सौम्य श्रृंगार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

भ्रष्ट राजनेताओं पर, तुम लिखो व्याप्त कुशासन पर,
लिखो लुट रहे चीरों पर, तुम लिखो नीच दुःशासन पर,
नारी शोषण के विरुद्ध तुम, अबला की चीत्कार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

मल-मूत्र भरे, छल-छिद्र युक्त मानव तन पर क्या लिखते हो,
छद्म आवरण, अस्थि-मांस-मज्जा, मन पर क्या लिखते हो,
नर-नारी पर लिखना है तो, अति पवित्र सहकार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

लिखो प्रकृति की सुंदरता पर, कल-कल बहते पानी पर,
लिखो खिल रहे फूलों पर और प्यारी चूनर धानी पर,
बंजर-नीरस मरुस्थल पर सावन की बौछार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

लिखो वीर मंगल पांडे पर, लिखो भगत बलिदानी पर,
रणचंडी, काली की प्रतिकृति उस झाँसी वाली रानी पर,
भर कर असि में मसि तुम, दुर्जन के शोणित की धार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

स्वाभिमान पर पोरस के, सांगा के अस्सी घाव लिखो,
लिखो बर्बरों के हमलों पर, लाखों उजड़े गांव लिखो,
देशभक्ति पर जान लुटाते राणा की तलवार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

लिखो नीच जयचंदों पर और अंग्रेज़ी जल्लादों पर,
चापेकर, सुखदेव पर लिखो और शहीद आजादों पर,
मातृभूमि का मान बढ़ाते, वीरों की ललकार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

जालियाँवाला बाग पर लिखो, लिखो महात्मा गांधी पर,
सत्य-अहिंसा अलख जगाती, ज़ुल्म मिटाती आंधी पर,
लिखो राजगुरु-बिस्मिल पर, उनका साहस ख़ूंखार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

लिखो बिलखते बच्चों पर, तुम लिखो देह व्यापारों पर,
लिखो मज़हबी दंगों पर, जलते गलियों-चौबारों पर,
अय्याशों की महफ़िल में तुम, घुंघरु की हुंकार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

लिखो जातिगत आरक्षण पर, प्रतिभा के उपहास पर लिखो,
जनमानस में बैर बढ़ाते, राजनीति-संत्रास पर लिखो,
तथाकथित सामान्य वर्ग पर राजनीति का वार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

क्या लिखते हो पतझड़ पर तुम, अरे कलम। मधुमास पर लिखो,
भौंरों के गुंजन पर लिख दो,कलियों के एहसास पर लिखो,
नववसंत के शुभागमन पर, गाता मस्त बहार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

लिखो तनिक मरुस्थल बनते प्रतिदिन बढ़ते बंजर पर,
लिखो वृक्ष की आत्मकथा तुम, उन पर चलते ख़ंजर पर,
सबल प्रकृति पर, निर्बल जन के कायर अत्याचार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

धरा धँसाते भूकम्पों पर, आग उगलते पर्वत पर,
लिखो असंतुलित दोहन पर तुम, धरती के धन अक्षत पर,
बुद्धिहीन मानव के द्वारा, यंत्रों का अतिचार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे,

लिखो उफनती नदियों पर तुम सागर के तूफानों पर,
लिखो कट रहे जंगल पर तुम और बढ़ते मैदानों पर,
लिखो बादलों के फटने पर, प्रकृति के प्रतिकार लिखो रे,
नारी के यौवन पर लिखना बन्द करो, अंगार लिखो रे।।”

(लगातार)

संजय कुमार शर्मा “राज़”

“प्रिय साथियों, आप सब तो मेरा लिखा पसंद करते ही हैं, क्या आप अपने दोस्तों को भी मेरी रचनाएँ शेयर “Share” नहीं करेंगे! उन्हें भी जोड़िए….ज़िन्दग़ी के खूबसूरत एहसासात के साथ….मुहब्बत के ज़िन्दा लमहात के साथ, आप सब का स्वागत है मेरे पेजेज़ पर।”

“Visit the paradise of hearts…ever young…ever fresh…ever alive…ever beating…then… “LIKE” n “Share” them …!!!”

Link Addresses for d pages;

Sanjay Kumar Sharma https://www.facebook.com/pages/Sanjay-Kumar-Sharma/243185802387450?ref=bookmarks
and
प्रेमग्रंथ – संजय कुमार शर्मा https://www.facebook.com/sanjaypremgranth

Say something
Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

About the Author:

My Life...My Rules

Leave A Comment