भाग्य से कोई मिला है
मन आज खुशी से झूम उठा है!

लगता है बारिश का प्यार
धरती को आज अंबर चूमे!

जब जब फूल में रस भर जाए
भंवरे को ललचाए दें सारी रात जगाए!

गाती कोयल राग बाहर के
जब-जब बहे सन-सन पूरब हवाएं!

जब तन-मन को छुए बदन को
मैं कहा होश में रह पाऊ हो जाऊ मैं बेक़ाबू!
प्रेम प्रकाश
01/08/2018

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