आत्म विश्वास

आत्म विश्वास

अटल,अमूल्य खड़ा जो

मानव हृदय स्थली में

निर्भय सा होकर

शक्ति रूप में प्रज्वलित होकर

 

गहन अंधकार को भेदता

आशा के स्वप्न पिरोता जो

एक दृढ़ माला होकर

 

वेग सा बनकर दौडता रक्त में

स्फूर्ति संचारित कर देता तन-मन में

बलशाली युद्ध में वीर सैनिक होकर

 

जीवन की विफलताए मानों

अवरोधक उसकी

भिड़ पड़ता उन पर

विकराल,निडर होकर

 

टूट पडता है बिजली की कौंध-सा

निराशा के बादलों पर

तलवार की धार होकर

असफलता,अज्ञान,निराशा

टेके घुटने सम्मुख उसके

इतना बल है अपने “आत्मविश्वास “का

 

सोनिया थपलियाल….

 

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