गांव बूढ़ा हो चला है

गांव और उसकी मिटटी बहुत प्यारी होती है

अधिकांश अन्न वहीं पैदा होता है हमारे लिए

हमारे लिए वो गांव और वंहा का किसान पिछड़ा है जो दिन रात की मेहनत से हमें अनाज देता है

समय अपनी गति से बदल रहा है

युग डिज़िटल हो गया है

पर क्या ये डिजिटल युग शुद्ध सेहतमंद अनाज दे पाएगा

मै शहर की हुई प्रगति से आपतित बिलकुल नहीं  हूँ

आपत्ति है उस सोच से जो गांव को पिछड़ा मानती है और वंहा के लोगो को हेय दृस्टि से देखती है

बदलाव के युग मे गांव भी पहले जैसे मनमोहक नहीं रह गए अब उन छतो पहले वाली बात नहीं रही जँहा चाँद तारों की बारात दिखाई दे

वंहा बड़े लोगो की बड़ी बिल्डिंग बन गई है

पलायन की प्रवृति जोर पकड़ ली है पुरखो के अलावा गांव को कोई नहीं पूछता

बच्चे बोर्डिंग स्कूल भाग लेते है और ताज्जुब इसबात का है  की इन होशियार लोगो के लिए आप अपना गांव ही घृणित हो जाता है

गांव वाले शहर और शहर वाले विदेश मे पलायन कर रहे है

भरित पुरित होते हुए भी आज गांव अकेला और बूढ़ा हो चला है..

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One Comment

  1. Pankaj Singh

    Bagheli boli me kahani chahiye

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