विनती करता हूँ

विनती करता हूँ

मैं तेरे से विनती करता हूँ
अब तुम आ जाओ मेरे पास!

मैं तेरे से विनती करता हूँ
अब तुम आ जाओ मेरे पास!

मैं तो सिर्फ तेरा नाम लेते रहता हूँ
सिर्फ तेरा ही इंतजार है मुझे है
तुम हो दयावान और मेरा कर्म
तुम मेरा हमदम हो मेरा सनम हो!

दे कर मुझे गम का सहारा दे दिया
कुछ तो बोलो मैं कैसे रहूँगा तू ही बता
अब रहम कर दो हमसे खता हुआ
अब अपनी नज़रे मेरे तरफ भी फेर दो

मैं तेरे लिए वर्षों से आश लगाए बैठा हूँ अब तू आ जा सब छोड़ के!
– प्रेम प्रकाश

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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