पिया मिलन की आश…

Home » पिया मिलन की आश…

पिया मिलन की आश…

By |2018-09-05T08:37:29+00:00September 4th, 2018|Categories: कविता|Tags: , |0 Comments

वह पिया मिलन की आस लिए बारी से देख रही राहे
करके नख शीख श्रृंगार ढूंढती प्रिय को आकुल दो बाहें।

एक तो यौवन का बोझ संभाले नही संभलता है कब से
ऊपर से घोर प्रतीक्षा यह मुख से आ जाती है आहे !!

यह प्रेम भी अजब निराला है कुछ नही समझने वाला है
कुछ और न सूझता इसे कभी ये तो बस मीत मिलन चाहे!

पल पल होता अधीर प्राण बस करना यही जतन चाहे
कुछ प्रेम का पल सुखन चाहे प्रिय से कुछ अभिनन्दन चाहे!!

अतृप्त आलिंगन मे आकर कुछ क्षण को प्यास बुझा जाते
इस मृत्त मरूस्थल पर कोई सपनो के फूल खिला जाते !

दो देह एक उर हो कर के जग को हम क्षणिक भूला जाते
अपने होठो की मदिरा का मुझको दो घूंट पिला जाते!

– मनोज उपाध्याय मतिहीन

Say something
No votes yet.
Please wait...

About the Author:

मनोज उपाध्याय मतिहीन, अयोध्या नगर महासमुंद,छ.ग. पिन 493445

Leave A Comment