वाह री जुबां

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वाह री जुबां

By |2018-09-07T14:59:54+00:00September 7th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

जुबां और रिश्तों का बड़ा ही गहरा नाता है,
जुबां गर मीठी हो तो हर कोई अपनाता है |
गर जुबां खुल जाये तो एक जंग सी छिड़ जाये,
जो जुबां चुपचाप हो तो एक सादगी छा जाये |
जुबां के खेल बड़े ही चालाक होते हैं,
कहीं मिलते हैं टूटे दिल तो कहीं तलाक होते हैं |

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