जिंदगी

बचपन बड़ा होता हैं
आँगन में
और आँगन में
तैरती हैं नाव
उड़ती हैं पतंग
खेल ते हैं खिलोने
आ जाते हैं राहों में
और राहें मिलती हैं
तिरहों पर
चोरहो पर
और एक दिन
येंराहें
फँस जाती हैं
जाम में(जिंदगी)

 पीयूष गोयल

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...