आधा मुँह घूँघट के अंदर, आधे का दीदार हुआ।
उसकी इसी अदा पर यारों, हमको तो है प्यार हुआ।
आधा चाँद छुपा बदली में, आधा बाहर लगता है।
आकर्षण उसके यौवन का, हमें खींचता लगता है।
मनमोहक सी छटा देखकर, हमको हर्ष अपार हुआ।
उसकी इसी अदा पर यारों, हमको तो है प्यार हुआ।

लाल चुनरिया की लाली से, मुख पर छाई लाली है।
अधर गुलाबी, नयन शराबी, लगे बड़ी मतवाली है।
लाजवती का मुखड़ा हमको, लगता चाँद सरीखा है।
उसके जैसा और दूसरा, हमें न कोई दीखा है।
रब से मांगा लगता हमको, वर कोई स्वीकार हुआ।
उसकी इसी अदा पर यारों, हमको तो है प्यार हुआ।

यौवन की मलिका वह लगती, नागिन सी बल खाती है।
चाल देखकर उसकी यारों, हिरणी भी शर्माती है।
आभूषण से लदा हुआ तन, लगता कितना सुंदर है?
सुंदरता का वह तो लगती, मानों एक समंदर है।
चाँद जमीं पर दूजा कोई, लगता है अवतार हुआ।
उसकी इसी अदा पर यारों, हमको तो है प्यार हुआ।

लगता है हमने भी कोई, अच्छा काम किया होगा।
ईश्वर की नजरों में शायद, अपना नाम हुआ होगा।
इसका फल हमको दाता ने, दे हम पर उपकार किया।
खुश होकर भवगन ने हमको, रूपवती का प्यार दिया।
ईश्वर आगे अर्घ्य चढ़ाना, लगता है स्वीकार हुआ।
उसकी इसी अदा पर यारों, हमको तो है प्यार हुआ।

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