जीवन चक्र

Home » जीवन चक्र

जीवन चक्र

By |2018-09-09T15:40:54+00:00September 9th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

हर संघर्ष को बड़े ही हर्ष से स्वीकार करते हैं,
खुदा की लिखी नियति का तहे दिल से आभार करते हैं|

कभी ग़मों का पर्वत तो कभी खुशिओं का अंबार है ये जीवन,
कभी सुलझती लगती हैं राहें तो कभी उलझन ही उलझन|

कहीं लगता वीराना सा तो कहीं जगमग है ये दुनिया,
हैं बुझते से चेहरे तो कहीं खिलती नयी कलियाँ|

जिन्दगी का सार यही है सुन ले ऐ पगले,
दुखों को कर तू अनदेखा फिर नयी राह तू चुन ले|

जिंदगी हर कदम तुझको नित नए सबक सिखाएगी,
कभी दुखों से रुला देगी तो कभी खुशियां बरसाएगी|

Say something
No votes yet.
Please wait...

About the Author:

Part time writer/Author/Poet

Leave A Comment