मेरे यारा… ओ मेरे यार

मेरे यारा… ओ मेरे यार…
मेरे यारा ओ मेरे यार
तेरे दिल की यही पुकार
ओ दिलवर वो दिलदार
मेरे यारा ओ मेरे यार
सावन भादों की पुरवैया यूँ ठंडी-ठंडी
झूमें बरसे, यूँ रिमझिम बरसे बलखाये
तन मन महकाए, दिल धड्काए
है प्यास मिलन की यार से
दिलवर ओ दिलदार से
तरसती निगाहें तेरी, तड़पता ये मन तेरा
मन में है आस दिल में जगी है प्यास
जो यार मिलन हो जाये
पल भर का चैन सकूं दे जाये
प्यासे मन को मिले करार
न तडपा तू न तरसा यार
मेरे यार, तेरे दिल की यही पुकार
ओ दिलवर वो दिलदार
मेरे यारा ओ मेरे यार…

मेरे ख्यालों में तेरा मुखड़ा आया
तेरी यादों ने फिर से मुझे रुलाया
ये मौसम, ये पल-पल कुछ कहने आया
संग एक दूजे के बिताये जो पल
उन यादों का संगम लाया है
मैं और तुम हम हो जाएँ
ऐ काश अगर ऐसा हो जाए
बीते हुए वो पल, जो मिल जाएं
मेरे यार, तेरे दिल की यही पुकार
ओ दिलवर वो दिलदार
मेरे यारा ओ मेरे यार…

कितना हँसी था मौसम, वो कितना हँसी नज़ारा
हर धड़कन को, था एक दूजे का सहारा
एक दूजे पे खुद से भी ज्यादा था भरोसा
है तेरे लिए ही धडके मेरी हर धड़कन
मेरी खामोशियां भी लाखों करें सवाल
ये हैं दिल के राज
कोई समझे या न समझे- यार
मिट न जाये दिल के हर अरमान
न तरसा न तडपा ओ दिलदार
इस सूने दिल में फिर से,
कर दे प्रेम की बरसात
तेरे दिल की यही पुकार
ओ दिलवर वो दिलदार
मेरे यारा ओ मेरे यार
तेरे दिल की यही पुकार…

– सुबोध उर्फ़ सुभाष

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