नशे की लत

Home » नशे की लत

नशे की लत

By |2018-09-11T17:01:48+00:00September 11th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

क्या हो रहा नौजवानों को, देश के सपूत महानों को|
तरह तरह के शौक है पाले, पड़ रहे हैं जीवन के लाले|
कहीं चल रहा दौर जाम का, कहीं सिगरटों की लगी झड़ी है|
किसी ने खा रक्खी है खैनी, तो बहुतों के सर पे भांग चड़ी है|
कोई कर रहा नशा घरों मैं, तो कुछ क्लब मैं भी चले जाते|
कोई भर रहा गांजा सिगरेट में, तो कुछ चाट के ही खा जाते|
नाना प्रकार के नशे यहाँ पर, नशों में बड़ी विविधता है|
सबको पता है गलत शौक है, पर फिर भी नहीं समझता है|
सम्भल जाओ ओ नौजवानों, नशे मैं कुछ नहीं रखा है|
क्यूं बुला रहे उन बीमारीओं को, जो देती घर और जीवन को धक्का है|

Say something
No votes yet.
Please wait...

About the Author:

Part time writer/Author/Poet

Leave A Comment

हिन्दी लेखक डॉट कॉम

सोशल मीडिया से जुड़ें ... 
close-link