मेरी मंज़िल

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मेरी मंज़िल

By |2018-09-12T13:50:03+00:00September 12th, 2018|Categories: कविता|Tags: |0 Comments

मंज़िल 
अ मेरी मंज़िल 
आ राहों में
इक दिन चल पड़ूँगा
उस तरफ
ओर मंज़िल मुझे मिल जायेगी
और 
अंत में
अस्त हो जाउगा|

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