काश काश

Home » काश काश

काश काश

By |2018-09-12T13:44:30+00:00September 12th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

काश, 
मेरा ज्ञान 
सूरज बन जाता 
चारो ओर प्रकाश फैलाता |
काश,
मेरा अज्ञान 
धुआ बन जाता 
ओर आकाश में कही गुम हो जाता|
काश,
मेरा घमंड 
काँच बन जाता टकराते ही 
चूर-चूर हो जाता |
काश,
मेरा आलस्या
पतंग बन जाता 
ओर डोर हाथ से टूट जाता|
काश, 
मेरा विश्वास
चट्टान बन जाता 
तोड़ने पर टूट न टूट पता|
काश,
मेरी छाया 
परछाई बन जाती सुबह होते ही फिर बुलाती 
ओर गले से लगाती|

Say something
No votes yet.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment

हिन्दी लेखक डॉट कॉम

सोशल मीडिया से जुड़ें ... 
close-link