भिखारी कौन

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भिखारी कौन

By |2018-09-13T15:57:42+00:00September 13th, 2018|Categories: लघुकथा|Tags: , , |0 Comments

ट्रैन आने वाली है। राम्या सीधे टिकट खिड़की पर पहुँचती है। भैया जयपुर का टिकट कितने का है। दो सौ पांच सामने से आवाज आई। एक मिनिट राम्या ये कहकर अपने बैग से अपना पर्स निकालने को बैग खोलती है। लेकिन पर्स वहाँ नहीं मिलता। शायद कपड़ो के नीचे दब गया होगा, राम्या ने अपने मन में सोचते हुए वहाँ टटोला। जब वहाँ भी नही मिला तो उसने पूरा बैग छान मारा।अब उसके होश फाख्ता हो गए। पर्स चोरी हो गया था।
अब उसे याद आया कि यहां तक आने के लिए जिस बस में वो चढ़ी थी। उसमे बहुत भीड़ थी। अब उसके समझ में आ गया था।जब उसने किराया दिया था और पर्स बैग में रखा था तो एक आदमी घूर घूर के देख रहा था। पक्का उसी का काम था। पर अब पछताय होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। उसे पैसो का दुःख नहीं था, उसका मोबाइल और डेबिट कार्ड भी उसी में थे।
अब उसने वहाँ खड़े लगभग हर व्यक्ति से अपनी रामकहानी बयाँ की और मदद माँगी। लेकिन किसी ने मदद नहीं कि पर मुफ़्त के प्रवचन जरूर दिए। एक ने तो हद कर दी बोला की लगता है भीख मांगने का नया तरीका है । थक हार कर बेचारी टिकट खिड़की पर गई और उसे अपनी समस्या बताई और मदद के लिए निवेदन किया। वह व्यक्ति बोला मैडम यहाँ हर दूसरे आदमी का पर्स खो जाता है और मै अगर सबका संकट मोचक बन गया ना तो मेरे बीवी बच्चे सड़को पे भीख मांगेंगे। पैसे है तो दीजिये। उम्मीद की आख़िरी किरण भी टूट गई। बेचारी पास पड़ी बेंच पे असहाय होकर बैठ गई।
अभी उसको बैठे हुये कुछ समय ही बीता था। उसके पास एक भिखारिन आई और बोली बीबीजी बहुत देर से देखरी मैं तुमको। क्या हुआ। राम्या थोड़ा सा डर कर सहम गईं। अरे डरती काई कु है ।मै बाहर से मैली है रे, अंदर से नही । बोलना क्या बात हुई ।
अब राम्या थोड़ी सहज हुई और बोली मै यहाँ एग्जाम देने आईं थी कल। सुबह होटल से निकल कर एग्जाम देने गई और जब वापस यहाँ आ रही थी तो बस में किसी ने पर्स मार लिया। अब टिकिट तक के लिए पैसे नही है और मेरी फूटी किस्मत ये की मै किसी को भी नही जानती यहाँ।
यहाँ दिल्ली में एक से एक चोर है बीबीजी। अरे अखियां से सुरमा निकाल ले पतो भी ना लगे। डर ना ये ले तेरा टिकिट।
राम्या ने जैसे ही टिकिट हाथ मे लिया उसकी खुशी का ठिकाना नही रहा।उसे लगा कि जैसे संसार की सबसे कीमती चीज उसके हाथ मे है। उसके आंसुओ ने आँखों का साथ छोड़ दिया था। अपने को संभाल ते हुवे उसने पूछा कि तुमने कब लिया ये।
जब तू उस हलकट से टिकिट मांग रही थी ना तो तेरा दुखड़ा नही देख सकी मै। तो ले ली मै तेरा टिकिट। वो देख तेरी रेलगाड़ी भी आ गई।
तुम्हारा ये अहसान कैसे चुका पाऊँगी। राम्या बोली। कोई बात नही बीबीजी। ये लो कुछ पैसे रख लो आगे काम आयेगे। नही मै नही रख सकती। आपने बहुत मदद कर दी है, राम्या ट्रैन में चढ़ते हुवे बोली। अब वो भिखारिन गुस्से से बोली जिद मत करो बीबीजी नही रखना है तो मेरा टिकिट भी वापस दे दो। अब राम्या को वो रखने ही पड़े। रही बात बीबीजी अहसास की आप भी कभी किसी की यू ही मदद कर दियो। ट्रैन ने सिग्नल दे दिया और राम्या से रहा न गया और उसने ट्रैन से उतर उसे कर कस के गले लगा लिया औऱ मन ही मन बोली,असली भिखारी तो ये तमाशा देखने वाली भीड़ है।तुम तो मेरे लिए भगवान हो।अरे ये क्या कर रही है बीबीजी रेल चल पड़ी है। राम्या दौड़कर ट्रैन में चढ़ गई और तब तक उसे देखती रही जब तक की वो आंखों से ओझल ना हो गईं।

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