जीवन पल दो पल की कहानी

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जीवन पल दो पल की कहानी

By |2018-09-13T16:11:42+00:00September 13th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

जीवन पल दो पल की कहानी
आते जाते सफर की निशानी
आज यहाँ कल कहाँ हो डेरा
कुछ भी नहीं है यहाँ पे मेरा

एक जीवन है जी भर कर जी लो
कुछ सुन लो मेरी कुछ तुम कह दो
अन्धकार का राज़ बहुत है
दीपक का उजियारा कर दो
बचपन की बातें है सुहानी
याद आती है वो हर शैतानी

जीवन पल दो पल की कहानी
आते जाते सफर की निशानी

अल्हड़ बचपन मस्ती में बीता
ना कोई बंदिश ना कोई चिंता
धूप से अपनी यारी बहुत थी
माँ का प्यार पिता की फटकार बहुत थी
बारिश के पानी में नाव चलानी
चुपके से आई उफ़ ये जवानी

जीवन पल दो पल की कहानी
आते जाते सफर की निशानी

सुख चैन नींद सब पीछे छूटा
हाय री जवानी तूने जमकर लुटा
एक अजीब सी दौड़ में भागा
जैसे अंधा पिरोता सुई में धागा
सूखती जा रही शाख की डाली
जवानी की करवट बुढ़ापे तक आ ली

जीवन पल दो पल की कहानी
आते जाते सफर की निशानी

अंतिम चैन अब यही पे पाया
बचपन में जाने का मन ललचाया
मौत ने मेरा दर खटकाया
मैने खुशी से गले लगाया
अंतिम दृष्टि जीवन पर डाली
आया था खाली गया भी खाली

जीवन पल दो पल की कहानी
आते जाते सफर की निशानी

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