जीवन पल दो पल की कहानी
आते जाते सफर की निशानी
आज यहाँ कल कहाँ हो डेरा
कुछ भी नहीं है यहाँ पे मेरा

एक जीवन है जी भर कर जी लो
कुछ सुन लो मेरी कुछ तुम कह दो
अन्धकार का राज़ बहुत है
दीपक का उजियारा कर दो
बचपन की बातें है सुहानी
याद आती है वो हर शैतानी

जीवन पल दो पल की कहानी
आते जाते सफर की निशानी

अल्हड़ बचपन मस्ती में बीता
ना कोई बंदिश ना कोई चिंता
धूप से अपनी यारी बहुत थी
माँ का प्यार पिता की फटकार बहुत थी
बारिश के पानी में नाव चलानी
चुपके से आई उफ़ ये जवानी

जीवन पल दो पल की कहानी
आते जाते सफर की निशानी

सुख चैन नींद सब पीछे छूटा
हाय री जवानी तूने जमकर लुटा
एक अजीब सी दौड़ में भागा
जैसे अंधा पिरोता सुई में धागा
सूखती जा रही शाख की डाली
जवानी की करवट बुढ़ापे तक आ ली

जीवन पल दो पल की कहानी
आते जाते सफर की निशानी

अंतिम चैन अब यही पे पाया
बचपन में जाने का मन ललचाया
मौत ने मेरा दर खटकाया
मैने खुशी से गले लगाया
अंतिम दृष्टि जीवन पर डाली
आया था खाली गया भी खाली

जीवन पल दो पल की कहानी
आते जाते सफर की निशानी

No votes yet.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *