आज मैं बहुत खुश हूं।
आज मैं आपके साथ सृजनकर्ता के सृजन की कहानी शेयर कर रही हूं। थोड़ा जुड़ना पड़ेगा मेरे साथ। मैंने पहली बार ही गणपति स्थापना की है। कल सारा मार्केट घूमे लेकिन कहीं भी मिट्टी की मूर्ति नहीं मिली और श्रीमानजी ने प्लास्टर ऑफ पेरिस के गणपति की स्ट्रिक्टली मना कर दिया था। फिर कुछ सोच कर अपने पुराने दिनों में पंडित जी द्वारा बनाए गणेश जी याद आ गए। किस तरह वे मिट्टी के ढेले पर कलावा लपेट कर गणेशजी स्थापित किया करते थे। फिर अचानक एक विचार आया, राजस्थान में गणगौर (शिव पार्वती) की पूजा होती है, और उसमें भी पूजा के बाद उनका विसर्जन कर दिया जाता है। मैं हर बार गमले में ही उनका विसर्जन करती हूं। इस बार उन विसर्जित शिव पार्वती की मूर्तियों की मिट्टी से ही हमने गणेशजी की प्रतिमा का सृजन किया है। और मुझे ऐसा लग रहा है, कि जैसे साक्षात शिव पार्वती के अंश से ही उनके पुत्र का जन्म हुआ हो। just feel it. इसलिए मैने पहले ही कह दिया था, मेरी मानसिकता से जुड़ने के लिए, तभी महसूस होगा।

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