नए ज़माने के नए रंग

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नए ज़माने के नए रंग

By |2018-09-20T12:42:08+00:00September 20th, 2018|Categories: व्यंग्य|Tags: , , |0 Comments

क्या जमाना आया भाई, हर तरफ आधुनिकता छायी|
बाल बढ़ाने लगें हैं छोरे, छोरिन ने चोटी कटवाई|
छोरिन ने चोटी कटवाई, गुदवावें जगह जगह टैटू|
फैशन के इस दौर मैं, बन रहे बजरबट्टू|
कपड़ों की क्या बात करें हम, कपड़े हो रहे बड़े विचित्र|
गले फटे से लगते हैं, होते उनमे विविध छिद्र|
होते उनमे विविध छिद्र, कैसी अजीब पसंद है|
मानो मलमल मैं लगा, टाट का पैबंद है|
मोबाइल का जिक्र न छेड़ो, ये आफत की जड़ है|
कोई रखे आयी फ़ोन का, तो कुछ मैं सैमसंग की अकड़ है|
कानों मैं दो तार घुसेड़े, चलते सीना तान के|
गाड़ियों का ध्यान न रखे, पड़ते लाले जान के|
कोई मस्त है कंप्यूटर मैं, तो कई लगे मोबाइल मैं|
अंदर से कितने ही रूखे, पर सेल्फी में स्माइल है|

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