किस दिशा में जा रहा है ये मेरा देश
खबरे पढ़-सुनकर मन व्यथित हो रहा
कैसे बनेगा विश्वगुरु ये मेरा देश
जिस युवा पीढ़ी पर नाज था हमको
वो व्यस्त दंगा फसाद में, हड़ताल में
कहीं अराजकता कही सम्प्रदयिकता
कही धरने, कही भर्ष्टाचार
नहीं चिंता किसी को समाज की
स्वार्थ की रोटी सब सेंक रहे
क्या करू कहाँ जाऊ किस्से कहूं मन की व्यथा
नैतिकता, देशप्रेम, मानवता
ढूंढे नहीं मिलती आज के इंसान में
आरोप-प्रत्यारोप में फंसे हैं नेता
देश को ही भूल गए कुर्सी की दौड़ में
किस दिशा में जा रहा ये मेरा देश
बेरोज़गारी नहीं समस्या, न ही महंगाई
मुख्य बात है जनता है अलसायी
हो हुनर तो पठार से भी पानी निकल सकता है
सोच बदले युवा तो देश बदल सकता है|

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