तुम नहीं समझोगे 

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तुम नहीं समझोगे 

By |2018-09-20T12:20:01+00:00September 20th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

तुम नहीं समझोगे
तन्हाई में भी एक नशा है
इंतज़ार का भी अपना मज़ा है
कभी किसी के लिए मिटकर देखो
सबकुछ खोने में भी एक मज़ा है
समय कभी नहीं ठहरता, पर
कुछ पल के लिए ठहर कर देखो तुम
कभी खुद को भुलाकर देखो तुम
शब्दो से परे एहसास की दुनिया में जाकर देखो तुम
सिर्फ फलक को ही न देखो
कभी इस ज़मी को भी प्यार से देखो तुम
अपने अंदाज़ से रोज़ जीते हो अपनी ज़िंदगी
आज मेरी तरह जीकर देखो तुम
कभी खुद को भुलाकर देखो तुम

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