तुम नहीं समझोगे
तन्हाई में भी एक नशा है
इंतज़ार का भी अपना मज़ा है
कभी किसी के लिए मिटकर देखो
सबकुछ खोने में भी एक मज़ा है
समय कभी नहीं ठहरता, पर
कुछ पल के लिए ठहर कर देखो तुम
कभी खुद को भुलाकर देखो तुम
शब्दो से परे एहसास की दुनिया में जाकर देखो तुम
सिर्फ फलक को ही न देखो
कभी इस ज़मी को भी प्यार से देखो तुम
अपने अंदाज़ से रोज़ जीते हो अपनी ज़िंदगी
आज मेरी तरह जीकर देखो तुम
कभी खुद को भुलाकर देखो तुम

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