हाँ हम मोटे हैं

हाँ हम मोटे हैं

कैसे कम कर लूँ में अपने इस वेट को,
बड़ी मुश्किल से पाला है अपने इस पेट को |
तुम क्या जानो देर सुबह तक सोना पड़ा है,
तब जाके ये निर्बल पेट बड़ा है |
सैर व्यायाम को कोई तवज्जो नहीं दी मेरे भाई,
तब जाके मैंने ये प्यारी तोंद है पाई |
नाना प्रकार के व्यजनों को खाया है गया,
उसके बाद ही इस वज़न को बढ़ाया गया |
तुम पतले हो इससे मुझे क्या फर्क है,
मुझे तो मेरे मोटे होने पे ही गर्व है |
पतले लोग हमारा सामना क्या कर पाएंगे,
रहेंगे डेढ़ हड्डी हम सदा खाते पीते कहलायेंगे |

No votes yet.
Please wait...

Rahi Mastana

Part time writer/Author/Poet

Leave a Reply

Close Menu