वो मस्ती भरे दिन 

वो मस्ती भरे दिन 

वो मस्ती भरे दिन
वो पीपल की छाँव
वो सखियों का साथ
लाल परी, नीली परी
पोशम्पा-भई पोशम्पा
बोल मेरी मछली कितना पानी
वो नन्हा सा राजकुमार
वो परियो की कहानी
वो बचपन आज बहुत याद आया
आज तो कैसा सूनापन है|
खाली चौपाल, खाली आँगन है|
वो नन्ही चिड़िया भी आज नहीं आयी
वो नानी का घर, वो दादी का प्यार
फिर से पाने को आँखे छलक आयी
एक-दूजे के लिए आज वक़्त नहीं है|
पर नेटफ्रैंड की कमी नहीं है|
इस तकनीकी दुनिया ने सबकुछ छीन लिया
नन्हे-मुन्हो से उनका भोला बचपन
और बड़ो से उनका सुख-चैन
दुनिया को तो जोड़ा पर
अपनी ही जड़ो से तोड़ दिया
– वन्दना शर्मा

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dr Vandna Sharma

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