जी लो हंसकर 

Home » जी लो हंसकर 

जी लो हंसकर 

By |2018-09-21T13:48:18+00:00September 21st, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

दो नन्हे मोती आंसू बनकर
बिन बुलाये मेहमान की तरह
कभी भी आ जाते हैं
भिगो जाते हैं मेरी पलकों को
और मैं कुछ कह भी नहीं पाती
ना ही इनकी आवभगत कर पाती हूँ
ना ही मना कर पाती हूँ
मत आना फिर से तुम
कैसे कह दू इनसे
अथिति देवो भव
यह तो हमारी संस्कृति है, परम्परा है
हाँ, स्वागत करुँगी इनका
मुस्कराकर
कभी ख़ुशी में, कभी उदासी में
जब शब्दो ने मेरा साथ छोड़ा
तब मेरी मौन अभिव्यक्ति बनकर
ये नन्हे मोती छलक आये
गीली आँखों संग होंठ मुस्कराये
मन में जिजीविषा जागी
ना बहना मत,
ए नन्हे आंसू
हंसना ही ज़िंदगी है
हँसाना ही ज़िंदगी है
जी लो हंसकर
ये पल फिर ना आये
– वन्दना शर्मा

Say something
No votes yet.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment