क्यों कोई अच्छा लगता है

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क्यों कोई अच्छा लगता है

By |2018-09-21T11:21:06+00:00September 21st, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

किसी चेहरे पर छायी उदासी ने
मन को छुआ
द्रवित हो रहा था उसके दुःख से
पर, दूजे ही पल
किसी चेहरे की चालाकी से
भर उठा मन घृणा से
एक ही पल में कहाँ खो गयी
ह्रदय की विशालता
कहाँ गया वो अपनापन
इतनी शीघ्र अनायास ही
ह्रदय परिवर्तन
समझ में नहीं आया
बल्कि छोड़ गया एक सवाल मानस पर
क्यों कोई अपना लगता है
क्यों कोई अच्छा लगता है
किसी से कटा कटा रहता है
ये मन कैसे रूप बदलता है
छाँव कहीं, धूप कहीं
कहीं मेघ बरसता है
– वंदना शर्मा

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