एक आश थी
एक तमन्नाएं थी
एक आरजू थी
एक मोहब्ब्त था
एक अधूरी दास्तान थी
एक मैं था एक तुम थी
तुम अपनी रास्ते हो गए
मैं अपनी रास्ते हो गया
कैसा किस्सा था
जो अब कहानी बन गया
क्या सफर था
जो खत्म हुआ!!
– प्रेम प्रकाश

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