एक आश थी

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एक आश थी

By |2018-09-22T14:21:56+00:00September 22nd, 2018|Categories: कविता|Tags: , |0 Comments

एक आश थी
एक तमन्नाएं थी
एक आरजू थी
एक मोहब्ब्त था
एक अधूरी दास्तान थी
एक मैं था एक तुम थी
तुम अपनी रास्ते हो गए
मैं अपनी रास्ते हो गया
कैसा किस्सा था
जो अब कहानी बन गया
क्या सफर था
जो खत्म हुआ!!
– प्रेम प्रकाश

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प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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