मतलबी संसार

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मतलबी संसार

By |2018-09-22T14:14:54+00:00September 22nd, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

शेर पे सवा शेर हैं, सबके मन मैं हेर फेर है |
अंदर अंदर सब जलते हैं, यहाँ अपने भी लगते गैर हैं |
यहाँ अपने भी लगते गैर हैं ,बात बात मैं फिर चिढ़ जाएँ |
मतलब है तो तलवे चांटे, बिन मतलब के पास ना आएं |
भाईचारा भूल चुके वे, बस मैं ही मैं लगे हैं रहते |
बिन पैंदे के लोटे बन रहे, हर बात पे खोटे बनते |
हर बात पे खोटे बनते, जीवन कर रहे व्यर्थ हैं |
अरे काम आओ एक दूजे के जीने का यही अर्थ है |
ये अहंकार ये दिखावा, सब यहीं रह जायेगा |
करले कर्म कुछ अच्छे, मोक्ष तभी तू पायेगा |

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