नारी
उमंग है,
कोमल तरंग है,
जीवन का नवरंग है,
विचार है, बहार है,
श्रृष्टि का सुंदरतम श्रृंगार है,
संस्कार है, पहरदार है,
आदि है, अनंत है,
पर इच्छाओं से,
परतंत्र है,
नारी…
-पूर्णिमा राज

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