जिंदगी में इतनी उलझने देख

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जिंदगी में इतनी उलझने देख

By |2018-09-24T17:45:06+00:00September 24th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

जिंदगी में इतनी उलझने देख,
हँसी आती है खुद की किस्मत पर।

जितना मैं जीना चाहती हूं सरल,
उतनी जटिल होती जाती है ये जिंदगी।

अब तो आंसुओं ने भी छोड़ दिया है साथ,
सूख गई है आंखें
पढ़ा था मैंने
विपत्ति इंसान को महान बनाती है।

ओहो मुझे महान बनना है,
फिर मैं कैसे घबरा सकती हूं
इन विपत्तियों से
लू के थपेड़ो से।

मुझे तो अमलतास बनना है,
जो भयंकर गर्मी में भी
गर्म हवाओ के बीच मुस्कराता है।

मुझे तो गुलाब बनना है
जो कांटों के बीच भी खिलखिलाता है।

ओहो, अब समझ आया
इतने इन्तिहां मेरी जिंदगी में क्यों?
क्योंकि मुझे तो महान बनना है
है ना!…

– वन्दना शर्मा

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