पक्षियों की गुहार

पक्षियों की गुहार

गौरैयों करें चहक-चहक करते
अपने में धुन में सदा ही रहते हैं
सुबेरे से साध तक आसामन में
रहती कितना मैं उड़ती रहूंगी!!

कहीं एयरटेल का टावर तो
कहीं जियो का टावर तो कहीं
वोडाफोन तो कहीं इडिया का
तो कहीं बीएसएनल का टावर
तो कहीं ऐसी के दूषित हवाएं!!

कब तक मैं इन प्रदूषित हवाएं
को सहन कर पाऊंगी अब दम
घुटता है ए संसारवाले मुझे इन
सब से निजात दिला दो मेरे देशवाशियों!!

अब हम पे सिर्फ एक ऐहसान
कर दो ए दुनियावाले हमें चैन
से रहने दो अब मुझे तो सुखद
सबेरा दे दो ताकि मैं आपके
घर और आंगन में चहक पाऊंगी
हमलोगों को प्रदूषित वातवरण
से बचा लो मेरे प्रिय संसारवाले!!
– प्रेम प्रकाश
पीएचडी शोधार्थी
रांची विश्वविद्यालय

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

Leave a Reply

Close Menu