मौसी का घर 

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मौसी का घर 

By |2018-09-25T11:03:12+00:00September 25th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

छुक-छुक ट्रेन से श्रीश पहुंचे मौसी के घर
दिल्ली से चली कालका, कालका से पिंजौर
पिंजौर से बडी, बडी है मौसी का घर
घुमक्कड़ श्रीश ने दो दिन में ही घूम डाले मंदिर सारे
कालका मंदिर, मंकी पॉइंट, बालाजी और गुरुद्वारा
साथ में देखा आते हुए पिंजौर गार्डन का सूंदर नजारा
जल महल में देखे फववारे, की जल क्रीड़ा,
श्रीश हो गया मस्त, करने लगा ता-थैया, ता-थैया
लगी भूख तब याद आया मौसी का घर
दिन था बड़ा सुहाना, खड़े थे बस के इंतज़ार में
अचानक लगे बरसने ओले, भागी भीड़ इधर-उधर
और श्रीश भागे होले-होले
हुई बारिश झमझमाझम, आयी समोसे की जब याद
पहुँच बड़ी स्टेशन, सबने पी चाय
और लिया गरम समोसे का स्वाद
नानी-नाना भी आये, संग मौसा जी भी आये
देख नटखट श्रीश को खूब हर्षाये
लो जी आया मौसी का घर, नहीं हो रहा भूख से अब सब्र
पूरी-सब्जी खाये सबने, गप्पे खूब लड़ाये सबने
अगले दिन बनी योजना, चलो नाप आये शिमला
लो जी हो गए श्रीश तैयार, करने सैर-सपाटा
मौसी-नानी-नाना संग बैठे ट्रेन में, कालका टो शिमला
मन मोह लिया सूंदर पहाड़ियों ने, लम्बी सुरंग ने
ट्रेन की चढ़ाई ने, पहाड़ो की हरियाली ने
चार बजे पहुंचे शिमला, देखकर ठंडा-ठंडा मौसम
हुआ बाबरा श्रीश का मन, करने लगे सड़क पर ता-थैया, ता-थैया
की पहले पेट पूजा, फिर आगे की सैर
ठंडी हवाएं छूकर जब गुजरती। रोम रोम पुलकित होता
और याद आते शॉल रज़ाइयां
सेल्फी क़्वीन मौसी और श्रीश की जोड़ी
जगह-जगह रूककर ली पिक्चर थोड़ी थोड़ी
पहुंचे फ्रिज पॉइंट, खाई आइसक्रीम और चाट
लगे जब कांपने ठण्ड से तो याद आयी सबको मैया
लो घूम आये श्रीश और मौसी शिमला

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