ए ज़िंदगी तुझसे हारने वाले हम नहीं 

ए ज़िंदगी तुझसे हारने वाले हम नहीं 

खुली आँखों से देखती हूँ सपने
और खो जाती हूँ उनमे
इस दुनिया को भूलाकर
जी लेती हूँ पल में कई एहसास
भर लेती हूँ अनेक रंग अपने कैनवास में
कौन जाने, ज़िंदगी किस मोड़ पर
किस राह पर मिला दे मुझे मेरे सपनो से
पूरे ना हो ये ख्वाब तो भी गम नहीं
दो पल की ख़ुशी हक़ीक़त से कम नहीं
टूटने के डर से छोड़ दे जो देखने सपना
ए ज़िंदगी तुझसे हारने वाले हम नहीं
गिर-गिरकर उठी हूँ, गिरने से कैसा डर
असफलताओं से सीखा है, कुछ खोया नहीं
मंजिल की परवाह किसे अब
रास्तों को ही हमसफ़र बनाया जब

No votes yet.
Please wait...

dr Vandna Sharma

i m free launcer writer/translator/script writer/proof reader.

Leave a Reply

Close Menu