आज की शिक्षा

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आज की शिक्षा

By |2018-09-26T15:06:05+00:00September 26th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

शिक्षा के ये हाल देख कर मन यूँ भर आता है,
हो जाता ह्रदय विचलित और आँखों को तर जाता है |
शिष्य बन चुके स्टूडेंट तो गुरु बन रहे अब सर हैं, 
शिक्षा बन चुकी अब एक धंधा गिर रहा इसका स्तर है |
ये कैसी शिक्षा है जहाँ गुरुओं का सम्मान नहीं,
भूल चुके गुरु रिश्ते को उनको भी गुमान नहीं |
गर टीचर डांटे बच्चे को तो एक बवाल उठ जाता है,
फेल हो गया बच्चा तो गुरु शिक्षा पे सवाल बन आता है |
टीवी, सोशल मीडिया जहाँ बन रहें आदर्श हैं,
नहीं जानते नादाँ हैं ये तो निरा सर्पदंश है |
डस जायेगा जीवन को तुम्हारे उज्जवल भविष्य को,
बाज आ जाओ छोड़ दो अपनालो अच्छे साहित्य को |
हे गुरु तुम से ही तो रखते हम सब यही कामना है,
गिरते हुए इस स्तर को अब तुमको ही थामना है |
ऐसा राष्ट्र बनाना है, चहुँमुखी विकास फैलाना है |
आध्यात्मिक,मानसिक और शारीरिक, बने वो ऐसे सामाजिक,
शिक्षा का प्रताप तभी जब नैतिकता फैले सामूहिक |

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