मन की अरदास

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मन की अरदास

By |2018-11-12T18:02:16+00:00September 26th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

एक प्रेमी जोड़ा बैठा हुआ है नायिका अपने प्रेमी से बहुत कुछ कहना चाहती है पर कह नहीं पा रही। इस गीत में नायक अपनी नायिका के दिल में हो रही हलचल समझने के बाद नायिका से कुछ यूँ कह रहा है

गर तू कहे तो दिल के रंज बता दूँ
दिल की हसरतें, मैं तुझको सुना दूँ…
मैं तुझको सुना दूँ
गर तू कहे तो दिल के रंज बता दूँ
दिल की हसरतें, मैं तुझको सुना दूँ
गर तू कहे तो दिल के रंज बता दूँ
देखी है झलक तेरी निगाहों में
जो जी भरके मैं देखूं, तेरी आँखों में
तेरे दिल की व्यथा मैं तुझको बता दूँ
तू कहे तो मैं फिर से हँसा दूँ
तेरे दिल की व्यथा मैं तुझको बता दूँ
तू कहे तो मैं फिर से हँसा दूँ
तेरे दिल की चाहत मैं तुझको जता दूँ
देखी है बहुत चाहत..
देखी है बहुत चाहत, तेरी निगाहों में
लगे है प्यासा बहुत
के लगे है प्यासा बहुत, प्यार को मन
आ जा.. आ जा लग जा..
आ जा लग जा गले से के
बेचैन दिल को ओ……..
बेचैन दिल को कुछ चैन सुकून मिले
जो तुझे तेरी धड़कन फिर से सुना दूँ
मैं तुझे तेरी धड़कन फिर से सुना दूँ
गर तू कहे तो दिल के रंज बता दूँ
तेरे दिल की हसरतें, मैं तुझको सुना दूँ
गर तू कहे तो दिल के रंज बता दूँ

जो तू सुने धडकनों की जुबाँ
गले से तुझको लगा लूँ
जो तू सुने धडकनों की जुबाँ
के गले से मैं तुझको लगा लूँ
के आरजू है क्या
के आरजू है क्या दिल की,
हाँ मैं आरजू बता दूँ
जोर दिल पे चलता नहीं
हाँ जोर दिल पे किसी का चलता नहीं
दिल की ये खाशियत, मैं तुझको बता दूं
गर हो इजाजत मैं तुझे अपना बना लूँ
गर हो इजाजत मैं तुझे अपना बना लूँ
तु मुझको छिपा ले
हाँ मैं तुझको छुपा लूँ…
तु मुझको छिपा ले
हाँ मैं तुझको छुपा लूँ…..आगोस में
पल दो पल के लिए,
पल दो पल के लिए, एक दूजे में,
पल दो पल के लिए, एक दूजे में खो जायें हम
रातों का है जागा मन
मुकम्मल नींद है चाहे
रातों का है जागा मन मुकम्मल नींद है चाहे
तू कहे तो मैं
हाँ तू कहे तो मैं…..
गर तू कहे तो दिल के रंज बता दूँ
दिल की हसरतें मैं तुझको सुना दूँ
गर तू कहे तो दिल के रंज बता दूँ

सुबोध उर्फ़ सुभाष
24/09/2018 10:10AM

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