बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

By |2018-09-27T15:35:00+00:00September 27th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

ओ निर्मोही निरलज्ज आत्माओं, अब तो होश मैं तुम आ जाओ|
अब तो होश मैं तुम आ जाओ, बेटी को बचाओ बेटी को पढ़ाओ|
बेटी मिलती बड़े सौभाग्य से, पुनर्जन्म के अच्छे कार्य से|
प्रभु ने कुछ सोचा होगा, तभी बेटी को सौंपा होगा|
कुछ तो डर ना पाप कर ऐ बन्दे, रख ले प्रभु का मान ऐ बन्दे|
बेटी से आती खुशहाली, बेटी बढ़ाती है रौनक|
मार रहा तू उसे पेट मैं, किसने दिया तुझे ये हक़|
क्यूँ भूल रहा तू भी किसी की बेटी का जाया है,
रख के तुझको अपने गर्भ मैं जिसने कष्ट उठाया है|
घोर समस्या समझे जिसको वो तो एक तपस्या है|
उसमे रूप अन्नपूर्णा का तो कभी माँ कामाख्या है|
यदि बेटी नहीं होगी तो घोर विपदा आ जाएगी,
लिंगानुपात बिगड़ जायेगा बड़ी दुविधा हो जाएगी|
बेटा बेटा करके तू कुछ नहीं कर पायेगा,
बिन बेटी के संसार मैं बहू कहाँ से लायेगा|
अब तो मान ले मेरा कहना,बेटी का सम्मान तू करना|
अब तू यही मनवाना होगा, हर जन को बुलवाना होगा|
बेटा बेटी एक समान, मेरी बेटी मेरा अभिमान|

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