तेरे कमाल की हद

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तेरे कमाल की हद

By |2018-09-28T08:58:46+00:00September 28th, 2018|Categories: गीत-ग़ज़ल|Tags: , , |0 Comments

तेरे कमाल की हद.तेरे कमाल की हद कब कोई बशर समझा;
उसी क़दर उसे हैरत है, जिस क़दर समझा;

कभी न बन्दे-क़बा खोल कर किया आराम;
ग़रीबख़ाने को तुमने न अपना घर समझा;

पयामे-वस्ल का मज़मूँ बहुत है पेचीदा;
कई तरह इसी मतलब को नामाबर समझा;

न खुल सका तेरी बातों का एक से मतलब;
मगर समझने को अपनी-सी हर बशर समझा।

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About the Author:

मेरा जन्म सन् 2000 में गोण्डा जिले के तिलया नामक ग्राम में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था मेरे पिता का नाम श्री शिव प्रसाद त्रिपाठी और माता का नाम श्री मती रूद्र मुखी देवी है ।

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