मन की बातें

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मन की बातें

By |2018-10-05T22:25:24+00:00October 5th, 2018|Categories: कविता|0 Comments

मन से बातें

मन से बातें करना कितना सकून मिलता है!
मन की नजर से खुद को देखना अच्छा लगता है!!
मन की आंखों से खुद को मापना अच्छा लगता है!
मन ही मन मे खुद से मिलना कितना अच्छा लगता है!!

जब भी एकांत में बैठों खुद में खुद की तलाशना!
मन से आत्मा को टटोलना कितना अच्छा लगता है!!
खुल के होने की वजूद को देखना अच्छा लगता है!
खुद को आगोश में रखना कितना अच्छा लगता है!!

अपने मन की बोली को टटोलना अच्छा लगता है!
अपने मन से खुद की बुराई करना अच्छा लगता है!!
सबसे पहले मन से बुराई करना अच्छा लगता है!
मन की पीड़ा को अपने अंदर दबाना अच्छा लगता है!!

मन की आईना से देखना खुद कितना सही हो!
मन की गहराई में जाना और खुद को सही करो!!
मन की त्रासदी को समझो खुद व खुद बदल दोगे!
मन की विचार को बदलो तुम इंसान बन जाओगे!!

अब मन को किसी के नियत मत खराब करो!
अब मन से इज्जत करने को कहों अच्छा लगेगा!!
मन को खुद पर काबू करने को कहों अच्छा लगेगा!
मन पर अपनी जीत हासिल करो अच्छा लगेगा!!

मन को ज़िंगदी से जोड़ के देखो अच्छा लगेगा!
मन को बीती हुई बातों पर विचार करने बोलो!!
मन को संतोष करने के उत्साहित करने बोलो!
मन को अपनी नजर में मानव बनने को कहों!!
प्रेम प्रकाश
पीएचडी शोधार्थी
रांची विश्वविद्यालय
रांची, झारखंड, भारत।
28/09/2018

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प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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