आ प्रिय! तुझको पंख लगा दु

आ प्रिय! तुझको पंख लगा दु

(बेटी के लिये पिता की आंखों में बसे सपने)

झर झर झरते आंसू पी कर,
नित नवीन जख्मों को सी कर,
तुझको मैं उड़ना सिख ला दु,
आ प्रिय! तुझको पंख लगा दु।

तेरी उम्मीदों की पताका,
नभ में सबसे ऊंची फहरे,
आये हिलोरे अगणित फिर भी,
तू सबसे आगे ही ठहरे,
तेरी रगों में निज रक्त बहा दु,
आ प्रिय! तुझको पंख लगा दु।

तुझसे ही मेरे श्वासों का बंधन,
तन मन धन सब तुझ पर अर्पण।

सब तुझसे, जो भी पाया हूं,
तुझ में विराट मैं हो पाया हूं।

अब मैं खुद को शून्य बना दु,
आ प्रिय! तुझको पंख लगा दु।

अपना योवन तुझ में भरकर,
हर दुख को अब हंसकर सह कर,
दुनियां से लड़ना सिख ला दु,
आ प्रिय! तुझको पंख लगा दु।

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