अहिंसा दिवस

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अहिंसा दिवस

By |2018-10-02T19:09:19+00:00October 2nd, 2018|Categories: अन्य|Tags: , , |0 Comments

अहिंसादिवस- लालबहादुर शास्त्री और राष्ट्रपिता महात्मागांधी के जन्मदिवस पर विशेष-
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और प्राकृतिक चिकित्सा से उनका संबंध-
महात्मा गांधी प्राकृतिक चिकित्सा के बहुत बड़े अनुयायी थे। उन्होंने एडोल्फ जुस्ट की पुस्तक Return To Nature को पढ़ा, तथा बहुत प्रभावित हुए। उसके बाद उन्होंने इस पद्धति का गहराई से अध्ययन किया,फिर सर्वप्रथम अपने स्वयं के, परिवारजनों के तथा आश्रमवासियों पर इसका प्रयोग किया। तथा महसूस किया कि भारतवासियों के लिए बीमारियों से बचने एवं स्वास्थ्य संवर्धन के लिए प्राकृतिक चिकित्सा सर्वाधिक उपयुक्त एवं श्रेष्ठ पद्धति है। गांधी ने प्राकृतिक चिकित्सा सम्बंधी कई लेख एवं किताबें भी लिखीं।तथा अपने कार्यक्रमों में भी इसे जोड़ा। जनता के स्वास्थ्य की समस्या को हल करने के लिए, महात्मा गांधी ने ही पूना के पास उरुलीकांचन में देश के प्रथम प्राकृतिक चिकित्सालय की स्थापना की। इस चिकित्सालय के प्रथम चिकित्सक वे (गांधी) स्वयं थे।उनका इस पद्धति में एक योगदान विशेष यह है कि, उन्होंने रामनाम को(आस्था के अनुसार प्रार्थना)को प्राकृतिक चिकित्सा का अंग बनाया।उनके कारण ही कई लोगों ने इस चिकित्सा पद्धति को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया तथा आजीवन इसके प्रचार प्रसार में लगे रहे। इनके प्रयास से ही पूरे राष्ट्र में प्रा.चि.का व्यापक प्रचार प्रसार संभव हुआ। इन्हीं लोगों के अथक प्रयासों से आज देश के कई प्रांतीय सरकारों ने इस पद्धति को मान्यता प्रदान की है। तथा आगे भी प्रयास जारी है। केंद्रीय सरकार ने भी इस पद्धति को प्रोत्साहन के लिए नई दिल्ली में `केंद्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद एवं राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान की स्थापना की है।तथा उम्मीद है यह पद्धति तीव्र गति से विकसित होकर गांव गांव तक पहुंच सकेगी।
इनकी पुस्तक Diet and Diet Reform आहारशास्त्र की अपने समय की उपयोगी पुस्तक है।
इनकी लिखी पुस्तक `आरोग्य की कुंजी’ का भाषाओं में अनुवाद हुआ तथा लाखों लोगों ने फायदा भी उठाया।

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