चोर और उच्चकों से भरे राजनेता
गजब और अजब के अफसर
विकास का ढोल और नगाड़ों से
हो रहे हैं प्रचार और प्रसार, नही
हो रहे हैं विकास और हो रहे हैं प्रचार!

सरकारी खजाने पर बैठे हैं कुंडी मारे
भाई से लेकर रिश्तेदारों तक भरे पड़े हैं!

इनके पहचान वाले को मिलता है
यहां नौकरी और ठीकेदारी…

साफ और सफाई के नाम पर कई
कड़ोर के हुए घोटाले हुआ न तनिक
सफाई भईया सब धन हुआ साफ

डकारें भी लिए जाएं न भईया
जाए ये दौरा फौरन के कुछ कहें
तो मेरा जीवन हो जाए खाक
सिंहासन क्या मिली सब किए वादे
हुए बेबुनियाद भईया सारे सपने हुए बेकार!
– प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी
रांची विश्वविद्यालय रांची
झारखंड भारत।

Rating: 5.0/5. From 1 vote. Show votes.
Please wait...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *