तुम पर बहुत एतेबार किया

तुम पर बहुत एतेबार किया

तुम पर बहुत ऐतबार किया…
खुद से ज्यादा तुम पर ऐतबार किया!

मुझे क्या मालूम तूम यू नईया डूबो दोगी
भरी नदी में हमें धकेल दोगी…

ताजुब है हम खुद ही खुद से मैंने
कभी खुद पर ऐताबर न किया और
गैरों की बातों से खुद को ख़ामोश किया…

इश्क़ में लोग ख़्वाब बहुत देखते हैं
जब इश्क से पर्दा उठ जाएं तो
जमीन भी नसीब नहीं होती

धर्म के ठीकेदारों की नजरे मोहब्ब्त
पर पड़ी तो दूध में पड़े मखी की तरह
बेधर्मी को निकाल फेंक देगे!!

बेवजह ही लोग अक्सर कहा करते हैं
इश्क़, ईश्वर,अल्लाह का दिया हुआ तौफा है!!

– प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी
रांची विश्वविद्यालय रांची,
झारखंड,भारत।

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प्रेम प्रकाश

प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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