जीवन की डगर

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जीवन की डगर

ज़िंदगी का सफर इतना आसान नही
हर पल एक नया सबेरा है जब जागो।

कुतूहर भरा जीवन मे हम रोज नई जंग
के साथ नया समस्या के साथ जीना है।

मनुष्य की हर एक नया कुछ पहलू घटता
के बाबजूद डगर को गम या खुशी निभातें।

भीड़ भरी दुनियां में सफर को जारी रखना
ही हर एक को अपना कृतिम बनाना पड़ता।

अंतिम क्षणों में भी एक ही बात मंजीर को
अलविदा करना तय है साथी इसे जीवन कहतें।
– प्रेम प्रकाश
पीएचडी शोधार्थी
रांची विश्वविद्यालय
रांची झारखंड भारत।

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प्रेम प्रकाश पीएचडी शोधार्थी (राँची विश्वविद्यालय) झारखण्ड, भारत।

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