सपनो को सजाया जाये

Home » सपनो को सजाया जाये

सपनो को सजाया जाये

By |2018-10-05T17:41:55+00:00October 5th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

कभी रहता था दिवाली का इंतज़ार
गिनते रहते थे दिन बार बार
सबसे छुपकर करते थे तैयारी
घर को सजाते थे बारी बारी

कहा गए वो बचपन के दिन
ना वो इंतज़ार रहा, ना वो पागलपन
सबकी ज़िंदगी में है बड़ी उलझन
कैसे करें स्वागत इन खुशियों का

वक़्त कहाँ है अपने लिए सोचने का
कब दिन ढला कब रात आयी
कब नींद से जागी, कब नींद आयी
सोचती हूँ कर दू बगावत खुद से

छोड़ सारी दुनिया जुड़ जाऊं खुद से
कुछ पल चुरा लू अपने लिए
कुछ पल जी लू अपने लिए
बड़ी कमजोर है ज़िंदगी की डोर

क्यों न इसके टूटने से पहले
सपनो को सजाया जाये
रुख खुशियों का मोड़ दे अपनी ओर

Say something
No votes yet.
Please wait...

About the Author:

Leave A Comment