बता मेरे मन तू क्या चाहता है
कभी तो अचानक से खुश हो जाता है
एक मासूम बच्चे की तरह खिलखिलाता है
कभी रुला देता है मेरी आँखों को सावन की तरह
बता मेरे मन तू क्या चाहता है
कभी कुछ पाना चाहता है, सब खोकर भी
कभी खामोश हो जाता है, शांत पानी की तरह
जिसमे एक कंकड़ भी फेंको विचारो की
तो तूफान उठते हैं जलजले की तरह
बता मेरे मन तू क्या चाहता है
उड़ता है कभी आसमां में परिंदो की तरह
कभी ग़ुम हो जाता है आँखों से ख़्वाबों की तरह
कभी नाचता है बेसुध होकर मयूर की तरह
कभी स्थिर हो जाता है चट्टान की तरह
बता मेरे मन तू क्या चाहता है

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