दिल का पथिक

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दिल का पथिक

By |2018-10-07T08:57:42+00:00October 7th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

हालात जमाने की कुछ वक्त की नजाकत,
कैसे कैसे बहाने भूलों के वास्ते।

अपनों के वास्ते कभी सपनो के वास्ते,
बदलते रहे अपने उसूलों के रास्ते।

कि देख के जुनून हम वतनों की आज,
जो चमन को उजाड़े फूलों के वास्ते।

करते थे कल तक जो बातें अमन की,
निकल पड़े है सारे शूलों के रास्ते।

खाक छानता हूँ मैं अजनबी सा शहर में,
क्या मिला खुदा तेरी धूलों के वास्ते।

दिल का पथिक है अकेला”अमिताभ” आज,
नाहक हीं चल पड़ा है रसूलों के रास्ते।

– अजय अमिताभ सुमन
:सर्वाधिकार सुरक्षित

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About the Author:

जीवन में बहुत सारी घटनाएँ ऐसी घटती है जो मेरे ह्रदय के आंदोलित करती है. फिर चाहे ये प्रेम हो , क्रोध हो , क्लेश हो , ईर्ष्या हो, आनन्द हो , दुःख हो . सुख हो, विश्वास हो , भय हो, शंका हो , प्रसंशा हो इत्यादि, ये सारी घटनाएं यदा कदा मुझे आंतरिक रूप से उद्वेलित करती है. मै बहिर्मुखी स्वाभाव का हूँ और ज्यादातर मौकों पर अपने भावों का संप्रेषण कर हीं देता हूँ. फिर भी बहुत सारे मुद्दे या मौके ऐसे होते है जहाँ का भावो का संप्रेषण नहीं होता या यूँ कहें कि हो नहीं पाता . यहाँ पे मेरी लेखनी मेरा साथ निभाती है और मेरे ह्रदय ही बेचैनी को जमाने तक लाने में सेतु का कार्य करती है.

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