ज़िंदगी तू इतनी बुरी भी नहीं है

ज़िंदगी तू इतनी बुरी भी नहीं है

जी चाहता है समेत लूँ
खुशियों को अपनी मुट्ठी में
जब भी होगा गमो से सामना
खोल दूंगी मुट्ठी
बिखेर दूंगी इन्हे चारो ओर
और ये पल मुस्कराएंगे
उस समय भी
जब गीली होंगी पलके
जब बुझने लगेंगी उम्मीदें
तब इन यादों का दिया
देगा मुझे नई रौशनी
मिलेगी नयी राह
और मैं मुस्कराकर कहूँगी
ज़िंदगी तू इतनी बुरी भी नहीं है

No votes yet.
Please wait...

dr Vandna Sharma

i m free launcer writer/translator/script writer/proof reader.

Leave a Reply

Close Menu