कर लो माँ की जयजयकार, आया नवरात्री का त्यौहार|
कलश स्थापित होते घर घर, सजने लगे हर मंदिर के द्वार|
देते बुलावा दिल से तुमको, सुन लो विनती तुम इस बार|
कर लो माँ की जयजयकार, आया नवरात्री का त्यौहार|
तू दुःख हरनी, तू सुख करनी, तुझसे ही है ये संसार|
पावन कर दो मेरा जीवन, दूर करो माँ कष्ट विकार|
कर लो माँ की जयजयकार, आया नवरात्री का त्यौहार|
देती दर्शन तुम उन सबको, जो सच्चे मन से करे पुकार|
एक निर्धन तुम्हें पुकारे, सुनलो उसकी भी करुण पुकार|
कर लो माँ की जयजयकार, आया नवरात्री का त्यौहार|
माना किये पाप बहुत हैं, पर दूर करे माँ सारे अभिसार|
हर पापों को धोती आयी, माफ़ करो माँ तुम फिर इस बार|
कर लो माँ की जयजयकार, आया नवरात्री का त्यौहार|
माना तेरा भक्त गरीब है, नहीं सजा पाए फल के थार|
सफल करो माँ तुम उस निर्धन को. भरो उसके भी भंडार|
माँ हे मेरी बड़ी अनोखी, माँ की महिमा अपरम्पार|
कर लो माँ की जयजयकार, आया नवरात्री का त्यौहार|

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