आओ सुनाओ तुम्हे एक कहानी
न कोई राजा न कोई रानी
जा रहा था एक पथिक अपनी ही धुन में
ख्वाबो को बनता मन ही मन में
सूरज लगा तेज चमकने’
राही छाया लगा ढूंढने
चारों तरफ नजर दौड़ाई
दूर-दूर तक थी न कोई परछाई
प्यास से गला सूख रहा था
साहस पीछे छूट रहा था
शायद कहीं कुछ ढूंढ रहा था
ठंडी छाया के लिए तड़प रहा था
सोच रहा था मन ये उसका
दे दे कोई पानी का छपका
काश! यहाँ कोई पेड़ होता
मौसम कुछ और होता
होती चारो तरफ हरियाली
झूम उठती डाली डाली
आओ हम सब पेड़ लगाए
धरती को आने वाले संकट से बचाए

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