कभी- कभी

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By |2018-10-18T23:30:05+00:00October 18th, 2018|Categories: कविता|Tags: , , |0 Comments

कभी कांटे भी अच्छे लगते हैं
कभी फूल भी चुभने लगते हैं
कभी हँसी रूकती ही नहीं
कभी आंसू थमते ही नहीं
कभी सब कुछ अच्छा लगता है
कभी कुछ मन को भाता ही नहीं
कभी ख़ामोशी अच्छी लगती है
कभी बातें ख़त्म होती ही नहीं
कभी समय ठहर सा जाता है
कभी फुर्सत मिलती ही नहीं
कभी किसी की याद तड़प बन जाती है
कभी मुलाकात होती ही नहीं
कभी सबकुछ भुलाने को जी चाहता है
कभी किसी की याद मिटती ही नहीं
कभी सारे सपने चुराने को जी चाहता है
कभी आँख लगती ही नहीं

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